रहस्य ले भरे मढ़ीप खोल गुफा.... अकती तिहार के पीछू पहली सम्मार के होथे मेला ये बार लॉकडाउन के सेती मेला नई होय... राजनांदगांव जिला मुखियालय ल...

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मंढीप खोल गुफा

रहस्य ले भरे मढ़ीप खोल गुफा....

अकती तिहार के पीछू पहली सम्मार के होथे मेला

ये बार लॉकडाउन के सेती मेला नई होय...

राजनांदगांव जिला मुखियालय ले  95 किलोमीटर दुरिहा छुईखदान जनपद म एक ठन बड़े जन गुफा हवय,कवर्धा जाए के सड़क म गंडई के नर्मदा माता जी के दरसन से शुरू होथे, ईहा ले 13 किलोमीटर अउ जंगल रस्ता ले ठाकुरटोला के तीर जाये ल पड़थे। येहर एशिया के दूसरैया सबले बड़े गुफा के मान पाये हे। येला मंढ़ीप खोल गुफा के नाव ले सब जानथे। ये गुफा अपन आप म बड़े जनि रहस्य ले भरे हवय। इंहा पुरातत्व बिभाग, अउ भूगोल के पढ़ैया मन बर खोजे के बुता हो सकथे। जेकर ले अउ कई ठन जानकारी मिल सकत हे।

अपन भीतर म कई ठन अनजानी बात ल धरे ये गुफा साल ल एक बार अकती तिहार के पीछू आवैया पहली सम्मार के खुलथे। ईहा भोलेनाथ के स्थापित शिवलिंग के दरसन करे बर भगत मन दुरिहा-दुरिहा ले आथे। बिहनिया ले नंगत के भीड़ लग जाये रथे। राजपरिवार के परमुख अउ पुरोहित मन के पूजा पाठ के पीछू गुफा के मुहाटी ल खोले जाथे।  ठाकुरटोला राजपरिवार के कुल देवता के ठौर आय। पूजा के पीछू भीतर म दरसन करे बर जा सकत हन। ईहा तीन ठन राज छत्तीसगढ़ के परोसी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा के मन घलो पहुँचथे।

 13 वी सताब्दी म बने गुफा के भीतर म शिव मंदिर,गौरी मंदिर, अउ दक्षिण मुखी हनुमान के मंदिर बनवाये गेहे जेहर देखे म खजुराहो के शैली म बने हे। गुफा म जाए कि पहिली ये मंदिर में के दरसन करत पूजा करे ले यात्रा पूरा मानथे। 

 दरसन करे बर ईहा के नदिया म 16 बार ले नहाके ल लगथे,जे अपन आप मे बड़े जान रहस्यमय बात आए। ओकर पीछू गुफा म जाये के रसदा मिलहि। गुफा म अब्बड़ अंधियार होय ले देखइया मन टार्च,मोबाइल के अंजोर म रद्दा पार करथे। कम जगह के सेती सूत के घलो जाये ल पड़थे।

गुफा म कोई पखरा मन अंजोर म हीरा सही अब्बड़ चमकदार हे, दरसन करईया मन ल येमन देखे बर जरूर अपन तीर तक खींच डारथे। ईहा के शिवलिंग मंदिर अउ चमगेदरी खोल गुफा ल अब्बड़ पबित्र माने जाथे। येकर तीर ले जाये बर लकड़ी के निसेनी म जाये ल पड़थे।  गुफा भीतरी कुंड घलो हे, जेला स्वेत गंगा कथे, ईहा नहाये ले चरम रोग दुरिहा होथे। पानी ल पिये ले पेट के बेमारी भाग जाथे। ऐसे सियान मन के कहना हे।

विद्वान अउ जानकर मन येला अब्बड़ रहस्यमय गुफा मानथे, ईहा भीतर म कई जगह उतार त चढ़ाव, मैदान हावे। गुफा के पखरा म देवी-देवता के चित्र बनाय हावे। पेड़-पौधा, पशु-पकछि,जानवर मन के चित्र बने हे। भीतरी म झरना के पानी गिरत रथे,जेकर ले भीतर के वातावरण बड़ नीक सुहावन ठंडा लागथे।

बरसात के पानी गुफा के भीतरी म खुसरथे जेकर ले भीतरी भर जाथे,गरमी के दिन म नदी के पानी में थोरिक कम होथे, एकर सेती आदमी मन के भीड़ जादा बाढ़ जाथे।

गुफा के पहली जंगल में म कई जगत रुके के बढिया पिकनिक स्पॉट जैसे जगह हावे। आवैया मनखे मन ईहा रुक के अपन थकान म मिटावत बइठे रथे। 

गुफा के रहस्य ल जाने बर मनखे मन हर साल भीड़ लगथे।ईहा के वातावरण घलो अब्बड़ सुहाना हावे। शौकीन मनखे मन दरसन के आंनद ले बर ईहा जरूर पहुँचते।

ये पहित कोरोना के लॉकडाउन के कारण मेला लगना मना करे गेहे। जेहर अभी के स्थिति के अंसार ठीक हे।

        हेमलाल सहारे
मोहगांव(छुरिया)राजनांदगांव

चित्र-नेट साभार

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